सन 1857 के महा स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की बलिदानी धरती पर स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी विद्यालय शरीर, बुद्धि तथा मन, इन तीन उपकरणों द्वारा अध्ययनरत बालक / बालिकाओ की जीवन धारा में निरंतर गतिशीलता व प्रावहमयता बनाने में सतत प्रयत्नशील हैं। विद्यालय परिवार इस बात पर विश्वास करता हैं कि शुद्ध व पवित्र मन से ही जीवन के उच्च मूल्यों एवं आदर्शो तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रति निष्ठावान होकर इनका अनुसरण करने में बालक कि आतंरिक दुर्बलता दूर होती है इसी उद्देश्य को लेकर हमारा यह विद्यालय देश के भावी नागरिको को दुर्बलता के व्यूह से निकलकर सबलता के साथ उन्नति शिखर पर आरुढ़ होने के लिए प्रोत्साहित करता है। सन 1921 में स्थापित इस विद्यालय ने प्राइमरी स्तर पर दृढ़ता पूर्वक खड़े होकर सन 1976 में जूनियर हाई स्कूल कि मान्यता प्राप्त कर अपना पहला कदम बढ़ाया। तत्पश्चात्य लगातार निष्ठा एवं लगन के साथ सन 1979 में हाई स्कूल 1987 में इंटरमीडिएड कॉलेज के पूर्ण विकसित वृक्ष के रूप में विकसित हुआ।
फलतः विद्यालय भवन नवीनीकरण कि प्रक्रिया के अंतर्गत कदम बढ़ाता हुआ आज 2 विशाल रंगमंच, 3 विज्ञान प्रयोगशाला, एक बड़े कक्ष एवं 31 अध्ययन कक्ष, 2 कार्यालय कक्ष एवं खेलकूद कक्ष से सुसज्जित है।
विद्यालय भवन दो भागो में विभाजित है एक भाग में प्राइमरी विभाग, दूसरे भाग में इण्टर कि कक्षाएं संचालित होती है। निर्माणी बोर्ड द्वारा स्वीकृत अध्यापको कि संख्या पूर्ण है। किन्तु प्राइमरी विभाग में एक अध्यापक द्वारा त्याग पत्र देने के कारण एक पद रिक्त है जिसका चयन प्रक्रिया शीघ्र ही पूर्ण होने कि संभावना है।
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जिसमे कुल सम्मिलित 43 छात्र/छात्राओं में 23 विद्यार्थियों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा 2 विद्यार्थी सम्मान सहित उत्तीर्ण हुए। सी. बी.एस.ई. द्वारा आयोजित हाई स्कूल परीक्षा परिणाम 95 % रहा। इण्टर का परीक्षा परिणाम 98.4% रहा जिसमे सम्मिलित 51 छात्रों में 33 छात्रों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया एवं चार छात्र सम्मान सहित उत्तीर्ण हुए। यह गर्व का विषय है कि माननीय शिक्षा निदेशक उ.प्र. ने इस विद्यालय को उत्तम परीक्षा परिणाम के कारण है स्कूल में अ श्रेणी तथा इण्टर में ब श्रेणी देते हुए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। परीक्षा परिणाम कि दृष्टि से इस विद्यालय का पांचवा स्थान है। विद्यालय कि इस सफलता का पूर्ण श्रेय मेरे सहयोगी शिक्षक /शिक्षिकाओं को जाता है। जिसके अथक परिश्रम, अटूट निष्ठा, पूर्ण सहयोग एवं विद्धता से आज यह विद्यालय वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ।
हमारी संस्कृति "जीवेम शरदः शतम" अर्थात सौ वर्ष जिये की कामना करती रही है। यह तभी संभव है जब हम गतिशील एवं स्वस्थ रहे। तदर्थ हमारे विद्यालय में प्रातः काल नित्य सामूहिक व्यायाम का कार्यक्रम रहता है। ताकि विद्यार्थी चुस्त होकर कक्षा में अध्ययन करें। इसके अतिरिक्त बालको में सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय भावना को उजागर करने हेतु विद्यालय 15 अगस्त, 2 अक्टूबर, बाल दिवस, गणतंत्र दिवस आदि पर्वो को बड़ी निष्ठा एवं धूमधाम से मनाया जाता है।
परीक्षा फल में गुणवत्ता लाने के लिए विशेष कक्षाएं भी आयोजित की गयी। छात्रों की प्रगति की लिखित सूचना समय समय पर अभिभावक को दी गई परन्तु खेद के साथ मुझे कहना पड़ रहा है कि अधिकांश अभिभावकों का सहयोग मुझे इस दिशा में नहीं मिला। आपने अपने बच्चो का भविष्य हमे सौपा है किन्तु आपके सहयोग के बिना यह कार्य सुचारु रूप से सम्पन नहीं हो सकता। इस सम्बन्ध में आपकी उदासीनता हमारी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि आप अपना सहयोग देकर बालको के सर्वांगीण विकास में हमारे सहायक बने।
श्री शशि भाल सिंह सेंगर
प्रधानाचार्या
अनुभव चीजों से ज्यादा संतोषजनक होते हैं।
बेहतरीन यादों के साथ हमारे कैंपस में आएं। यहां हमारे कार्यक्रमों, कार्यशालाओं की झलक है।